क्यों एक बेटा अपनी मां के जिस्म का दीवाना है?

1. देखिये सबकी कंडीशन एक जैसी नहीं होती।

कुछ लड़को के जन्म के समय माँ की उमर 18-20 साल होती है तो ऐसे में, लड़का 16 का होने पर माँ को 36-38 की पूरी औरत के रूप में देखती है। तो ऐसे में उसके मन में अपनी माँ के जिस्म से खिंचाव हो सकता है। पर यहां बहुत सारे ऐसे भी हैं जब मां 36-38 की हुई तब जाके इनका जन्म हुआ और इनकी जवानी आने पर मां 50 के पार की बुधिया हो चुकी होती है और उनका जिस्म का खिंचाव बहुत दूर जा चुका होता है।

अब उसकी उमर उसकी माँ से 25-30 साल से ज्यादा कम है वो तेरा नीचा दिखायेंगे कि कैसे इंसान हो माँ के प्रति ऐसे ख्याल रखता हो। अब उनको फैलाने का कोई फायदा नहीं।

2. अगर किसी महिला को 15 से 20 साल की उम्र में बेटा हो जाए तो वह महिला जब तक 35 साल की होगी उसका बेटा भी 15 साल का होगा, यह उम्र वही होती है जब अपोजिट सेक्स के प्रति सबसे ज्यादा आकर्षण होता है, यह तो पारिवारिक रिश्ता और बंदों का प्रभाव यह है कि इस तरह सोचने से भी परहेज होता है यही वजह है कि घर में भी महिलाओं के लिए पर्याप्त मृत्युदा और एक दूसरे से दूरी बनी रहती है एक महिला अपने पति के सामने इस तरह से रहती है अपने बेटे या भाई के।

उसके सामने इस तरह से नहीं रह सकता कि इस तरह की मर्यादाओं का पालन पहले हुआ करता था लेकिन अब यह मर्यादाएं टूट रही हैं और अक्सर महिलाएं अपने बेटे या बच्चों के सामने ही कपड़े बदल देती हैं और अगर गलती से नजर आ जाए तो महिलाओं के कामुक अंगों पर पड़ जाता है।तो लड़के का शरीर के प्रति आकर्षण स्वाभाविक है। लेकिन सामाजिक मंच के चलते वह घर में कुछ नहीं कहती, लेकिन बाहर हम अपनी उम्र की दूसरी लड़कियों को देखकर उनके साथ खुले विचारों से अपनी कल्पना करते हैं। पर मन में अगर रिश्ते के प्रति सम्मान कम हो जाए तो ऐसी स्थिति में जिसे वह देख रहा है उसके साथ भी स्पष्ट कल्पना करने लगता है। यह आकर्षण सिर्फ शरीर का होता है।

3. माँ अपने बच्चे को जिस्म से चिपकाती है। बच्चे के समय बीतने के साथ बड़ा हो जाता है बड़ा होने पर वह विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित होता है लेकिन उसकी माँ उसे बच्चे की तरह प्यार करती है।

यदि माँ भी बच्चे की उम्र के अनुसार उससे थोड़ी दूरी बना लें तो कोई समस्या नहीं रहती। लेकिन उसकी माँ अभी भी उसे अपने सीने से प्यार करना चाहती है इसी वजह से कुछ बेटे अपनी माँ के जिस्म के दीवाने हो जाते हैं।

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